माँ के भोसड़े ने लंड निगल लिया


हैल्लो दोस्तों, यह बात उस समय की है जब मेरी उम्र 20 साल थी और मेरी माँ की उम्र 34 साल थी। उस समय मेरे ऊपर जवानी चढ़ना शुरू हुई थी। मेरी जवानी के शोले अंदर ही अंदर भड़कते थे और मेरी माँ बहुत ही सेक्सी और सुंदर है। उसका शरीर बड़ा ही सुंदर आकर्षक है और उनके बूब्स का आकार 38-32-38 था। उनके बूब्स और गांड बहुत बड़े आकार के थे और उनका वो सुडोल गोरा बदन बहुत ही हसीन था।

दोस्तों में जब भी अपनी माँ को देखता तो मुझे उनका सेक्सी गोरा बदन देखकर मन में गुदगुदी होती थी और में उनको एक दो बार पूरा नंगा नहाते हुए भी देख चुका था। मुझे ऐसा करने में बड़ा मज़ा आया। दोस्तों में बचपन से ही अपनी मम्मी के बेडरूम में उनके साथ ही सोता था। मैंने तब माँ पापा को कई बार सेक्स करते हुए भी देखा था और वो तब बिल्कुल अँधेरे में सेक्स किया करते थे, लेकिन मुझे उनकी आवाज़ आती थी और वो दोनों क्या मस्त मस्ती से अपना वो काम किया करते थे। पापा, मम्मी को धक्का मारते तो माँ दर्द की वजह से अपने मुहं से आह्ह्हह्ह उह्ह्हह्ह की आवाज़ निकालती और वो उछल उछलकर पापा का पूरा साथ देती थी। फिर में हर रात को सोने का नाटक करके थोड़ी जल्दी सो जाता और फिर कुछ देर बाद वो दोनों कमरे की लाइट को बंद करके अपना काम शुरू कर देते थे। तब वो दोनों समझते थे कि में गहरी नींद में सो रहा हूँ इसलिए वो बिना किसी डर चिंता के अपने काम को करने लगते, लेकिन में उस समय सोने का नाटक किया करता था और फिर में अपनी आखों को थोड़ा सा खोलकर उनका वो सेक्सी खेल देखने लगता था, जिसकी वजह से कुछ देर बाद मेरा लंड तनकर खड़ा हो जाता वो बार बार ऊपर नीचे होकर झटके देने लगता। फिर उस समय में भी सोचता था कि में भी कैसे इस खेल का आनंद लूँ? और यह बात सोचकर मेरा लंड कई बार तनकर खड़ा हो जाता और रात को यह सभी बातें सोचते सोचते मेरे लंड का रस निकल जाता और उसके बाद वो ठंडा होकर छोटा हो जाता और में सो जाता।

दोस्तों एक दो बार तो जब मेरी माँ मेरे पास में सोई हुई थी तब में जानबूझ कर उनसे चिपककर सो जाता और कभी उनके पैरों के बीच में अपने पैर को डाल देता तो उनकी नींद खुलने पर वो मुझे अपने से अलग कर देती। फिर में मन ही मन में सोचता रहता कि वो मेरे साथ क्यों नहीं चिपकती? में कई बार अच्छा मौका देखकर उनके कूल्हों पर अपने हाथ फैरता और कभी उनके बूब्स को भी दबा देता तो वो तुरंत मेरा हाथ अपने बदन से दूर हटा देती और में फिर से किसी अच्छे मौके की तलाश में रहता कि मुझे कब मज़ा मिलेगा और यही बात सोचता और रोज उनको सेक्स करते हुए देखता। फिर में उस वजह से गरम हो जाता। एक बार उन्हे पता चल गया कि मैंने उन दोनों को सेक्स करते हुए देख लिया है तो वो अब दूसरे रूम में जाकर सेक्स करने लगे थे, में अपनी माँ के बूब्स को हमेशा प्यार से निहारता था जब भी वो खाना परोसती या झुककर कुछ काम करती तो उनके बूब्स कपड़ो से कुछ बाहर निकल जाते और वो जब चलती तो उनके हिलते कूल्हों के बीच में फंसी साड़ी को में ध्यान से देखता, तभी वो मुझे देखती तो अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक करती और अपनी साड़ी को कूल्हों से ठीक किया करती। दोस्तों में बचपन से ही अपनी माँ की जवानी का शबाब और उनके वैसे ही कई आकर्षक रूप देखता आया हूँ और मैंने एक बार माँ की अलमारी में सेक्सी फोटो की किताब देखी और उसमे एक नंगी औरत का एक मर्द के साथ सेक्स करते हुए फोटो था। उसको देखने में मुझे मज़ा आता और उस किताब के द्रश्यों को देखते देखते मेरे लंड से रस निकलकर बाहर आ जाता। एक बार की बात है उस दिन मेरे पापा को उनके किसी काम की वजह से बाहर जाना था और वो चले गये और उस दिन घर पर भी और कोई नहीं था। फिर रात को खाना खाने के बाद में और माँ टीवी पर एक फिल्म देख रहे थे। उस फिल्म में भी बहुत सेक्सी द्रश्य थे जो मुझे अब गरम कर रहे थे और फिल्म में कुछ देर बाद सेक्सी गाने आने लगे, लेकिन इस बीच माँ वहां से उठकर चली गयी थी। फिर केबल टीवी पर अब एक ब्लूफिल्म आने लगी थी, में तो उसको देखकर एकदम चकित हो गया और मैंने सुना था कि आधी रात के बाद केबल टीवी पर सेक्सी ब्लूफिल्म दिखाते है, लेकिन उसको देखने का मुझे कभी मौका नहीं मिला था और मैंने एक दो बार 2-4 मिनट जरुर देखी थी, लेकिन आज मेरे पास बहुत अच्छा मौका था और यह बात मन ही मन में सोचकर में देखने लगा। तभी मुझे विचार आया कि कहीं माँ ना आ जाए और मैंने सोचा कि माँ उनके रूम में सोने चली गयी है और मैंने उनको अपने आसपास देखा, लेकिन मेरे पास कोई नहीं था और में चैनल बदलकर वो ब्लूफिल्म देखने लगा, वाह क्या मस्त सेक्सी फिल्म थी? उसमे औरत मर्द को चुदाई करते हुए पूरा दिखाया था। मैंने पहले से ही टीवी की आवाज को बंद कर दिया था और अचानक से मुझे ऐसा लगा जैसे कि मेरी माँ भी मेरे पीछे दरवाजे के पास खड़ी होकर वो फिल्म देख रही है। फिर मैंने धीरे से अपनी चोर नज़रों से उनको देख लिया, लेकिन माँ को भी इस बात का पता नहीं चला कि मैंने उनको देख लिया है। अब मैंने मन ही मन में सोचा कि जब माँ ने भी इस फिल्म को देख ही लिया है और वो भी इसको मज़े लेकर देख रही है तो चलने दो इसे।

अब हम दोनों वो ब्लूफिल्म देख रहे थे, तभी मैंने आवाज को हल्का सा बढ़ा दिया और अब मेरा लंड भी सख्त हो गया था और में उस समय पजामा पहने हुआ था। में अब कपड़ो के ऊपर से अपने लंड को सहलाने और पकड़ने लगा था, तभी अचानक में पीछे घूम गया और माँ को देखकर में उनको बोला कि अरे माँ तुम अब तक सोई नहीं, अच्छा तो अब मेरे साथ बैठकर देख लो आप कितनी देर तक वहां पर खड़ी रहोगी। फिर वो मेरे पास आकर सोफे पर बैठ गयी और फिल्म में वो दोनों कितने मज़े से चुदाई का आनंद ले रहे थे। उसमें वो औरत उसको बार बार बोल बोलकर सेक्स का तरीका बताकर उससे अपनी चुदाई करवा रही थी। अब मैंने आवाज को थोड़ा सा बढ़ा दिया और अब में माँ की गोद में उनकी जाँघो पर लेट गया और हम फिल्म देख रहे थे। फिर तरह तरह से चुदाई के तरीके देखकर मेरा लंड पजामे में एकदम खड़ा था और बेताब हो रखा था, जिसको माँ बहुत ध्यान से देख रही थी। फिर माँ ऐसे ही कुछ नीचे झुकी तो उसके बूब्स मेरे मुहं पर आ गए तो मैंने अपने होंठो के बीच उनके बूब्स को ले लिया, लेकिन वो कुछ नहीं बोली और मेरी हिम्मत अब ज्यादा बढ़ गई। अब मैंने थोड़ा सा ऊपर होकर उनके बूब्स के निप्पल को दबा दिया और मैंने देखा कि अब तो वो भी उस फिल्म को देखते देखते आहह्ह्ह उह्ह्ह कर रही थी और अपनी चूत को खुजाने लगती। फिर बूब्स को मसलने लगती और कभी अपने दोनों होंठो को आपस में दबाने लगती तो कभी होंठो को दाँत में दबाने लगती। फिर में तुरंत समझ गया कि यह इस समय बहुत जोश में आ चुकी है और वो अब अपने ब्लाउज में हाथ डालती। एक बार तो साड़ी से पेटीकोट में अपने हाथ को डालकर उन्होंने अपनी गरम चूत में भी ऊँगली करना शुरू किया। अब मैंने उनसे पूछा कि क्या हुआ क्या आपको कहीं दर्द है? वो मेरी बात को सुनकर बस मुस्करा दी और में उनकी गोद में लेटे लेटे ही अब उनकी गोरी चिकनी कमर पर हाथ फेर रहा था। साड़ी की वजह से उनकी कमर पूरी नंगी थी और पीछे से एकदम खुली हुई थी। में मन ही मन में अब सोचने लगा कि आज मेरे पास बहुत अच्छा मौका है, शायद मेरे हाथ से यह मौका निकल जाए तो मुझे दोबारा ना मिले, में कोशिश करके देखता हूँ। अब मैंने अपने एक हाथ से उनकी चूत को हल्का सा दबा दिया, लेकिन उनकी तरफ से कोई भी विरोध ना देखकर अब मैंने साड़ी के ऊपर से ही अपनी दो उँगलियों से में चूत को दबाने लगा, तब उसने आह भरी। अब वो फिल्म खत्म होकर उसका दूसरा हिस्सा शुरू होने वाला था तभी माँ मुझसे बोली कि बहुत देर हो गयी है अब तुम सो जाओ और टीवी को बंद कर दो।

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