भाई की करतूत पापा को बताई तो …


मेरा नाम प्रिया है. मेरे घर में मैं, मम्मी, पापा और एक भाई है. पापा का अपना खुद का बिजनेस है और माँ सरकारी स्कूल में टीचर है. भाई मुझसे दो साल छोटा है. उसका नाम रोहित है. वह स्नातक की पढ़ाई कर रहा है.
यह कहानी आज से एक साल पहले की है. मेरे भाई की उम्र 18 साल के ऊपर जाने वाली थी. वह मुझसे उम्र में 4 साल छोटा है. बात तब की है जब उस वक्त मेरा भाई बाहरवीं पास करने ही वाला था. मैं अपने ग्रेजुएशन के फाइनल ईयर में थी.

तो उस दिन हुआ यूँ था कि मेरा भाई अपने कमरे में अपना कुछ काम कर रहा था. मुझे किसी और काम से उसके कमरे में जाना पड़ गया, उसने मुझे अचानक से अपने कमरे में आती देख कर अपना लेपटॉप बंद कर दिया. वह थोड़ा सा घबराने लगा. मैंने जब उससे घबराहट का कारण पूछा तो उसने नहीं बताया. मैंने भी उस वक्त उस पर ज्यादा जोर नहीं दिया. मुझे ये भी पता था कि उसका किसी के साथ चक्कर चल रहा था. शायद वह उस वक्त उसी से बात करने में लगा होगा वीडियो कॉल पर.
मैं समझ तो गई थी कि उसकी घबराहट का कोई और कारण नहीं हो सकता है. मैं उसके कमरे से अपनी किताब लेकर चुपचाप निकल गई.

एक दिन की बात है जब पापा बिजनेस के काम से शहर से बाहर गये हुए थे. उसी दिन नानी की तबियत खराब हो गई. मेरी माँ मेरी नानी के घर पर उनकी देखभाल करने के लिए चली गयी. मैं और मेरा भाई, हम दोनों के अलावा उस दिन हमारे घर पर कोई भी नहीं था. रात का समय हो गया तो मैंने खाना बनाया और खाना खाते समय भाई से पूछा कि उसका किसी के साथ चक्कर तो नहीं चल रहा है?
वह बोला- तुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि मेरा किसी के साथ चक्कर चल रहा है?
मैंने कहा- उस दिन जब मैं तेरे कमरे में गई थी तो तू किसी से वीडियो कॉल पर बात कर रहा था. मुझे लगा कि तेरी कोई सेटिंग होगी.
वह बोला- नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है.
मैंने कहा- देख, मैं तेरी बहन हूँ. अगर ऐसी कुछ बात है तो तू मुझसे शेयर कर सकता है. मैं तेरी मदद करने के लिए तैयार हूँ.
वह बोला- नहीं, ऐसी कोई भी बात नहीं है.

यह कहकर वह उठ कर चला गया. मुझे उसका बर्ताव कुछ अजीब सा लग रहा था. रात को करीब एक बजे के लगभग मेरी नींद खुली तो मैं पेशाब करने के लिए बाथरूम में गयी. मैंने देखा कि भाई के कमरे का दरवाजा खुला हुआ था. मैंने अंदर झांक कर देखना चाहा कि वह सही से सो रहा है या नहीं. मैं उसकी बड़ी बहन हूँ और मुझे उसकी फिक्र रहती थी.
मैंने झांक कर देखा तो वह अपने कमरे में नहीं था. मैं एकदम से परेशान हो गयी. मैंने सारा का सारा घर छान मारा मगर वह कहीं नहीं मिला मुझे. उसके बाद मेरे दिमाग में छत का ख्याल आया. मैं छत पर जाने लगी. मैंने देखा कि छत का दरवाजा खुला हुआ था. वैसे मुझे भी रात में अकेले छत पर जाने में डर लग रहा था मगर फिर भी मैं हिम्मत करके छत पर पहुंच गयी.
मैं छत पर पहुंच कर देखने लगी तो हैरान रह गयी कि वह छत पर भी नहीं था. मैं सोच में पड़ गयी कि यह लड़का आखिर गया तो गया कहाँ?
हमारे घर की बगल में चाचा की छत जुड़ी हुई थी. मैंने सोचा कि चाचा की मदद लेती हूँ. मैंने चाचा को आवाज देने के लिए उनकी छत पर जाकर देखा. उनकी छत पर एक छोटा सा कमरा बना हुआ था.

एक बात मैं आपको बता दूँ कि मेरे चाचा के पास कोई औलाद नहीं है. वह रोहित को ही अपना बच्चा मानते हैं. मेरे दिमाग में सबसे पहले चाचा का ही ख्याल आया कि वह रोहित को ढूंढने में मदद कर सकते हैं.
जब मैं उनकी छत से गुजर रही थी तो मुझे उस छोटे से कमरे के अंदर से कुछ आवाजें आती हुई सुनाई दीं. मेरा ध्यान उस कमरे की तरफ गया तो मैंने देखा कि उस पर कोई दरवाजा नहीं लगा हुआ था. मैं कमरे की तरफ बढ़ने लगी तो आवाजें तेज होने लगीं.

मैंने अंदर झांक कर देखा तो मेरे पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई. मेरी चाची ने सारे कपड़े उतारे हुए थे और वह मेरे भाई के लिंग से खेल रही थी. जो चाची मेरे भाई को अपना बेटा मानती थी वह मेरे भाई के लिंग को हाथ में लेकर सहला रही थी. आज मुझे समझ में आया कि वह मेरे भाई से इतना प्यार क्यों करती है. अब मैं ये भी समझ गयी थी कि मेरा भाई भी रात में चाची से ही बात करता रहता होगा. मैं तुरंत पीछे हट गई.

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