नौकर की बीवी की चुदाई


जब रूपा बर्तन साफ करके, पास के स्टोर रूम में जा रही थी, तो वो रूम के दरवाजे की दहलीज पर रुक गई. उधर थोड़ी देर रुक कर उसने मेरी ओर देखा. जब मेरी और रूपा की नज़रें आपस में टकराईं, तो रूपा बड़ी अदा के साथ मुस्कुरा उठी और अपनी गांड मटकाते हुए स्टोर रूम में चली गयी.
यह मेरे लिए खुला निमंत्रण था.

मैं उठकर स्टोर रूम की तरफ गया और फिर कुछ देर दरवाजे पर खड़ा रहा. मेरे दिल में ख़ुशी की उमंगें उठ रही थीं. नया माल मिलेगा यही सोचते हुए में मस्ती में रूम के अन्दर चला गया. अन्दर आकर देखा, तो रूपा खटिया पर बिस्तर लगा रही थी.

मैंने धीरे से रूम को अन्दर से लॉक किया और बिना किसी आहट के पीछे जाकर रूपा को अपनी बांहों में भर लिया. वो एकदम से घबरा गयी.
रूपा ने पीछे मुड़ कर मेरी ओर देखते हुए कहा- उफ़फ्फ़ हटिए मालिक क्या कर रहे हैं … कोई देख लेगा. … छोटी भौजी आ जाएंगी.
मैं उसे गले पर चुम्बन करते हुए बोला- तो आ जाएं … क्या होगा उसको भी यहां तुम्हारे साथ ही चोद दूँगा.

रूपा ने कामुक मुस्कान अपने होंठों पर लिए हुए कहा- ऊफ्फह्ह छोटी भौजी कह रही थीं, आपने रात को उनकी गांड चौड़ी दी. मुझे तो सुनकर ही डर लग रहा है कि आज मेरा क्या होगा?
मैंने रूपा को छोड़ कर खटिया पर बैठते हुए कहा- मेरी रांड … चल अपनी मामी की तरह तेरी भी चौड़ी कर देता हूँ, चल आ जा इधर.

रूपा हंसती हुई मेरे पास आ कर बैठ गई. मैंने झट से अपने सारे कपड़े उतार दिए और अपना लंड उसको दिखाया. वह कामवासना से भरी निगाहों से मेरे शानदार हथियार को देखती रही.
मैं- इसको पकड़ो तो सही और थोड़ा सहला कर तो देखो मेरी रूप की रानी.
रूपा ने अपने हाथ बढ़ाए और मेरे लंड को अपनी मुट्ठी में लेकर सहलाने लगी.
रूपा- वाह मालिक, बहुत बड़ा है.

रूपा के हाथों का स्पर्श पाते ही मेरा लंड बुरी तरह से भड़क गया. कुछ देर तक रूपा ने मेरे लंड को सहलाया और फिर ज़मीन पर घुटनों के बल बैठते हुए मेरे लंड को अपने होंठों में दबा लिया.

रूपा अपने होंठों को मेरे लंड के सुपारे पर कसके रगड़ते हुए लंड को चूसने लगी. फिर धीरे धीरे से मेरे लंड को आधा मुँह में ले लिया. मैं थोड़ा उसकी तरफ झुका और अपने दोनों हाथों से उसके ब्लाउज के हुक्स खोल दिए. रूपा की बड़ी बड़ी चुचियां ब्लाउज के हुक्स खुलते ही बाहर आ गईं.

अब मेरी आंखों के सामने बड़े बड़े सेब के आकार की उसकी दोनों चूचियां आ गयीं, जिनके काले लम्बे निप्पल बिल्कुल तने हुए थे. यह मादक दृश्य देखकर मेरा लंड झटके खाने लगा. मैंने ने रूपा को उसके कंधों से पकड़ कर खड़ा कर दिया और उसे अपनी ओर खींच कर बेड पर लिटा दिया. फिर बिना देर किए झुक कर रूपा की लेफ्ट चुची को मुँह में भर लिया.

रूपा अपने एक निप्पल पर मेरे होंठों को महसूस करके और गरम हो गयी और उसके मुँह से कामुकता से भरपूर सिसकारियां निकलने लगीं- उम्ह्ह ह्ह मालिक ओह धीरे चुसोओ..
मैं- आह क्या मस्त चूचियां हैं … मज़ा आ रहा है.
रूपा- आऽऽऽह … दूसरी भी चूसिए ना … उसमें भी मजा भरा है.

अब मैं रूपा की एक चूची दबा रहा था और एक मुँह में लेकर चूस रहा था, रूपा मस्ती में ‘सी … आऽऽहहह..’ कर रही थी.

मैं बारी बारी से दोनों चूचियों को चूसे जा रहा था. तभी दरवाजे पर कुछ आहट हुए और उधर से धीरे से आवाज आई- मालिकऽऽऽ मैं रमेश, दरवाजा खोलिए मुझे देखना है.
मैंने रूपा की तरफ बुरा सा मुँह करके देखते हुए- जाओ उसे अन्दर ले आओ.

रूपा गई और उसने दरवाजा खोलकर रमेश को अन्दर लिया और झट से दरवाजा बंद कर दिया.
मैंने खटिया पर लेटे लेटे अपना लंड सहलाते हुए कहा- कहो काका क्या देखना चाहते हो?

रमेश काका ने हाथ जोड़कर नीचे फर्श पर बैठकर कर कहा- मालिक, इसकी चुदाई देखना चाहता हूँ. इसकी चुत में बड़ी गर्मी है, साली दिन भर न जाने किन किन मजदूरों को लंड लेती फिरती है कुतिया.
रूपा- बुड्डे तेरे लंड में तो दम है नहीं, इसीलिए तो मेरी चुत की आग दूसरों से ही बुझनी पड़ती है ना.
मैंने गुस्से में कहा- चुप हो जाओ तुम दोनों … काका देखना हो तो चुप बैठ कर देखो.

रूपा खुश हो गई.

मैंने मुस्कुराते हुए उससे कहा- अरे रूपा डार्लिंग जरा यहां खड़ी हो जाओ.

रूपा ठीक रमेश के सामने खड़ी हो गई. फिर मैंने रमेश से कहा- चलो अब इसकी साड़ी तुम अपने हाथों से निकालो, इसे पूरी नंगी कर दो.
रमेश उठा और ‘जी मालिक …’ बोलते हुए अपनी जवान पत्नी को मालिक के लिए नंगा करने लगा. उसने रूपा की साड़ी उतार दी और उसके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया. अब रूपा हमारे सामने पूरी नंगी थी.

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