सास माँ की चुदाई ने भगाई सर्दी


एक तो कड़ाके की सर्दी, ऊपर से बारिश और साथ में ओले. स्कूटर पर आते आते जैसे शरीर में ठंड से अकड़न आ गयी थी. जिस्म भीगने से.. और सर्द हवा के कारण सर्दी से बुरा हाल था. जब स्कूटर पर चलते चलते सहन शक्ति जवाब देने लगी, तो एक साइड में रोककर.. पनवाड़ी से एक सिगरेट ली और उसे पीते हुए ऑफिस के सहकर्मियों की बातें सोचने लगा, जो इस भयंकर ठंड में घर जाकर अपनी अपनी बीवियों को चोदने की बातें कर रहे थे.

आखिर कल से दो दिन की छुट्टी थी और आज बारिश की वजह से जल्दी छुट्टी कर दी गयी थी. लगभग सभी सहकर्मी शादीशुदा थे और सबकी शादी नयी जैसे ही थी. महानगर की भाग दौड़ के कारण कोई बच्चों के चक्कर में न पड़कर, सिर्फ कमाने, खाने, जोड़ने और चोदने की सोचता है.

“यही तो मज़ा है ठंड का, घर जाकर नहा कर सीधे आरुशी की चूचियां पियूँगा, मस्त चूचियां है यार उसकी, आज मज़ा आएगा चुदाई का. जब लौड़ा उसकी गांड और चूत में जाएगा, तो सारी सर्दी भाग जाएगी, उसकी भी और मेरी भी. पिछले 20 मिनट में तीन बार मिस कॉल कर चुकी है, बस उसको उसके ऑफिस से लेकर सीधे घर और अगले ढाई दिन साला कच्छी तक पहनने नहीं दूंगा उसको.” अनिरुद्ध अपने लंड को खुजलाते हुए बोला था.

“मेरी वाली तो आज सुबह ही कह रही थी कि आपकी दो दिन की छुट्टियाँ हैं, मैं सारा घर का काम जल्दी निपटा कर रखूंगी, जल्दी आ जाना. उसे लौड़ा चूसने का बड़ा शौक है, चुदाई चाहे करनी हो या नहीं … पर हर रोज़ रात को जब तक लौड़ा नहीं चूस लेती है, उसे नींद नहीं आती, अपनी भी मौज है यार.” आकाश ने भी कह दिया था.

उनकी इन सब बातों को सोचते हुए मैं अपनी किस्मत को कोस कर रहा था कि मैं तलाकशुदा इन तीन दिनों में क्या करूंगा?
काम्या (मेरी पूर्व पत्नी) सुन्दर बीवी थी परन्तु उसे कैरियर बनाना था, जिसमें मैं उसकी बड़ी अड़चन था. इसलिए वो मुझसे तलाक लेकर विदेश चली गई.

खैर, सिगरेट खत्म हुई, मैंने भी स्कूटर स्टार्ट किया और अपने कमरे पर चला गया. पूरी तरह भीगने के कारण मुझे सर्दी ज्यादा लग रही थी. कमरे में जाकर एसी का हीटर ऑन किया और कपड़े निकाल कर अपने आपको तौलिये से पौंछ कर अपने कपड़े लेने अलमारी खोल कर देखा, तो याद आया कि आज सुबह ही सारे कपड़े धोबी को दे दिए थे, सिर्फ एक जोड़ी बची थी, उसे पहनकर मैली करने का मन नहीं हुआ. निक्कर और अंडरवियर देखे, तो वो बाहर सुखाने डाल कर गया था, इसलिए वो बारिश में गीले हो चुके थे.

यहाँ किसने आना है अब, सारे कपड़े अन्दर सुखा देता हूँ और लुंगी पहन लेता हूँ, जब तक लाइट है, तब तक तो ठंड लगेगी नहीं. फिर बिस्तर में लेट जाऊंगा, कल की कल देखेंगे. कुछ देर बाद बारिश रुक जाएगी, तो धोबी को फ़ोन कर दूंगा, वो कपड़े दे जाएगा. मैं अपने आप से बुदबुदाया.

मैंने कपड़े उतार कर लुंगी पहन ली. फिर चाय बनाकर पी और जो खाना पैक करवा कर लाया था, वो खा कर एक सिगरेट सुलगाई और टीवी ऑन किया ही था कि डोरबेल बजी.

मैंने सोचा धोबी होगा, शायद कपड़े देने आया होगा. दरवाज़ा खोला तो सामने बारिश से पूरी भीगी हुई काम्या की माँ यानि मेरी पूर्व सास पुष्पा उर्फ़ पूषी खड़ी थीं.

“बारिश के कारण मेरी स्कूटी बंद पड़ गयी और उसे एक मैकेनिक को देकर तुम्हारे पास आ गयी. यहीं मैडिटेशन सेंटर आई थी सुबह. असल में स्कूटी स्लिप हो गयी थी और पैर मैं कुछ चोट भी लग गयी है. मैं और कहाँ जाती बेटा, यहाँ से घर कितनी दूर है, तुम तो जानते ही हो.. और मैकेनिक स्कूटी कल सुबह देगा. तुम्हें ऐतराज़ न हो तो मैं यहाँ रुक जाऊं, वैसे भी घर पर अब कौन है?”
मेरी सास पूषी एक ही सांस में बोल गयी.

“आप अन्दर आ कर कपड़े बदल लो और अपने आप को सुखा कर कुछ खा पी लो.. बाद में सोचते हैं.” मैंने दरवाजा बंद करते हुए और सिगरेट मसल कर बुझाते हुए कहा.

मैंने सासू को ध्यान से देख कर तो लग रहा था कि जैसे वो किसी गहरे पानी में डुबकी लगा कर आई हों. उन्होंने अपना ओवरकोट, स्वेटर, साड़ी उतारी तो देखा कि उनके हाथ और कंधों पर हल्की चोट लगी थी.

मैंने उनको अपना तौलिया देते हुए कहा- आप ये तौलिया ले लो और बाथरूम में चली जाओ, मैं तब तक आपके लिए चाय बनाता हूँ.
कोई 15 मिनट बाद मेरी सास पूषी ने अन्दर से आवाज़ दी- बेटा, मुझे पूछते शर्म आ रही है, पर कोई कपड़े हैं, तो दे दो, मेरे सारे कपड़े गीले गए हैं.

“आज मेरे पास सिर्फ दो लुंगियां हैं, एक मैंने पहनी है, एक आप पहन लो, अभी तो और कुछ नहीं है मेरे पास. कहो तो किसी पड़ोस की आंटी से ले आऊँ?”
“नहीं.. वो लुंगी ही दे दो एक बार, सबको बतायेंगे तो कोई खामखा शक करेगा.”

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